‘मुल्क की तामीर व तरक़्क़ी में नौजवानों के किरदार’ पर MSO ने किया सेमिनार

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कानपूर: मुस्लिम स्टूडैंटस आर्गेनाईज़ेशन आफ़ इंडिया के ज़ेर-ए-एहतिमाम मुहम्मद अली पार्क चमनगंज कानपूर में मुल्क की तामीर व तरक़्क़ी में नौजवानों के किरदार के मौज़ू पर एक सेमिनार का इनइक़ाद किया। इस मौक़ा पर मुफ़्ती सनाउल मुस्तफा मिस्बाही ने अपना मक़ाला पेश करते हुए कहा कि ये एक तस्लीम शूदा हक़ीक़त है कि किसी भी मुल्क की तरक़्क़ी में नौजवानों का किरदार सफे अव्वल के सिपाही की तरह होता है, अक़वाम-ए-मुत्तहिदा भी इस बात को तस्लीम कर रहा है कि मुआशरे की सलामती, तहफ़्फ़ुज़ और अमन बरक़रार रखने में नौजवानों का किरदार कलीद है और नौजवानों की शिरकत से ही मुआशरे में मुसबत तबदीली को उजागर किया जा सकता ह।

मुफ़्ती सनाउल मुस्तफा मिस्बाही ने कहा कि हर जमात अपने ख़ाबों को शर्मिंदा ताबीर करने के लिए नौजवानों के तआवुन की मुहताज होती है। यही वजह है कि हर जमात की कोशिश होती है कि उसे नौजवानों की ज़्यादा से ज़्यादा हिमायत हासिल हो, क्योंकि किसी भी मुल्क, क़ौम या मुआशरे में हक़ीक़ी और मुसबत तबदीली नौजवान ही ला सकते हैं, जब नौजवान मुख़लिस हो कर अपने मुल्क-ओ-क़ौम के लिए मेहनत और जद्द-ओ-जहद करने लगते हैं तो मुसबत तबदीली, तरक़्क़ी और बेहतरी को कोई नहीं रोक सकता, कामयाबी उनके क़दमों की धूल ज़रूर बनती है। नौजवान ही वो क़ुव्वत हैं, जो अगर इरादा कर लें तो मुल्क की बागडोर सँभाल कर मुल्क को ओज-ए-सुरय्या पर पहुंचा कर दम लेते हैं। कामरानी इन अक़्वाम की क़दम-बोसी करती है जिनके नौजवान मुश्किलात से लड़ने का हुनर जानते हैं। ख़ुशहाली इन अक़्वाम के गले लगती है, जिनके नौजवानों के अज़ाइम आसमान को छूते है।

सेमिनार में ख़िताब करते हुए मौलाना हम्माद अनवर ने कहा कि क़ौमी तरक़्क़ी का हुसूल सिर्फ उसी सूरत में मुम्किन है जब तलबा और नौजवान नसल इख़लास के साथ इस मक़सद के लिए ख़ुद को वक़्फ़ कर दें। उन्होंने कहा कि नौजवान मुल्क-ओ-मिल्लत का मुस्तक़बिल होते हैं। क़ौम के मुअम्मार होते हैं। किसी भी क़ौम में नौजवान क़ौम का क़ीमती सरमाया तसव्वुर किए जाते हैं। नौजवान मिल्लत की तामीर-ओ-तरक़्क़ी में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते है।

नौजवान दिमाग़ी-ओ-जिस्मानी लिहाज़ से बाक़ी उम्र के तबक़ों से ज़्यादा मज़बूत होते हैं। हिम्मत-ओ-जज़बा उनमें कूट कूट कर भरा होता है। कठिन हालात का जवाँमरदी से मुक़ाबला उनकी ख़ूबी है। किसी भी क़ौम की तरक़्क़ी की ज़मानत नौजवानों में मुज़म्मिर है। इस क़ौम की राह तरक़्क़ी में कोई भी रुकावट हाइल नहीं हो सकती, जिसके नौजवान मेहनती हो।

मुफ़्ती साक़िब अदीब मिस्बाही ने कहा कि नौजवान तालीम हासिल करने के साथ साथ कोई ना कोई हुनर सीखने की कोशिश भी ज़रूर करें ये हुनर एक तो आपके अपने लिए भी कारा॓मद होगा कि आपके लिए अमली ज़िंदगी में एक से ज़्यादा रास्ते खुल जाऐंगे और इस के साथ साथ आपके लिए इन्सानों को इन्सान समझना ज़्यादा आसान हो जाएगा।  सेमिनार का आग़ाज़ क़ुरान-ए-पाक की तिलावत से हुआ। MSO के कन्वीनर मुहम्मद अबू अशरफ ज़ीशान सईदी ने ऐम ऐस ओ का तआरुफ़ पेश किया। साथ ही उन्होंने ऐम उसकी कारकर्दगी को भी बयान किया। सेमिनार मुफ़्ती साक़िब अदीब मिस्बा ही की दापर इख़तताम पज़ीर हुआ।

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