विश्व शान्ति दिवस पर MSO कानपुर ने आयोजित की चर्चा, इस्लाम शांति का मज़हब, कट्टरता की कोई जगह नहीं।

कट्टरपंथी विचारधारा का इस्लाम से कोई ताल्लुक नहीं

कानपुर – देश के सबसे बड़े छात्र संगठन मुस्लिम स्टूडेंट्स ओर्गेनाईज़ेशन ऑफ इंडिया की कानपुर यूनिट ने 21 सितम्बर विश्व शान्ति दिवस के मौके पर चमनगंज स्थित ‘द हादी इंस्टीट्यूट’ में एक कान्फ्रेंस का आयोजन किया जिसकी सरपरस्ती काज़ी ए शहर कानपुर मुफ्ती साकिब अदीब मिस्बाही साहब ने की और कांफ्रेंस की सदारत कानपुर यूनिट के प्रेसिडेंट मुहम्मद वासिक़ बेग बरकाती साहब ने की I
कांफ्रेंस का आग़ाज़ हाफिज़ मोनिस चिश्ती ने कुरान की आयत पढ़ कर किया और अदनान अहमद बरकाती, आदिल कादरी ने नात व मनकबत पढ़ी I कांफ्रेंस में मुख्य अतिथि के रूप में एम.एस.ओ उत्तर प्रदेश के सदर मौलाना अबू अशरफ साहब व उन्नाव यूनिट के प्रेसिडेंट मौलाना शोएब मिस्बाही साहब मौजूद रहे और मुख्य वक्ता के रुप में आये रोशन नगर मस्जिद ग़ौसिया के पेश इमाम व अल बरकात इस्लामिक रिसर्च एंड ट्रैनिंग इंस्टीट्यूट अलीगढ़ से फारिग़ मौलाना नज़र मुहम्मद साहब ने तकरीर की और कुरान की आयतें पढ़ कर उसका मतलब बताते हुए कहा कि हमारे मज़हब में वज़ू करते वक्त फिज़ूल पानी बहाने तक को मना किया गया है तो कैसे किसी इंसान का ना हक खून बहाने की इजाज़त दे सकता है I आगे मौलाना साहब ने कहा कि कट्टरपंथी विचारधारा और आतंकवाद का इस्लाम से कोई ताल्लुक नहीं जिस तरह तालिबान इस्लाम के नाम पर आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है वो बिल्कुल गलत है तालिबानी विचारधारा बिल्कुल गलत है हिन्दुस्तान का मुसलमान तालिबानी विचारधारा के खिलाफ है और इसकी मज़म्मत करता है I जिस तेज़ी से सैन्य अभियान चला कर तालिबान ने महज़ कुछ सप्ताह में अफ़ग़ानिस्तान पर कब्ज़ा किया है, उसने दुनियाभर के सुरक्षा और कूटनीति मामलों के विशेषज्ञों को परेशानी में डाल दिया है, माना जा रहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की सत्ता आने के साथ ही दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में बड़ा बदलाव आ गया है इसके साथ ही भारत के लिए अब स्थिति पहले से अधिक मुश्किल हो गई है और पाकिस्तान से सटी अफ़ग़ानिस्तान की सीमा पूरी तरह से लोगों के लिए बंद नहीं हैं, इसके आर-पार जाना लोगों के लिए बेहद आसान है, पाकिस्तान लंबे वक्त से अफ़ग़ानिस्तान से जुड़े मामलों में भी सक्रिय भूमिका निभाता आया है I अब व्यापारिक रूप से पाकिस्तान का सहयोगी चीन भी अफ़ग़ानिस्तान में अधिक दिलचस्पी दिखा रहा है, बीते महीने चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने तालिबान के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक अहम बैठक की थी, जो इस बात का संकेत है कि पड़ोसियों के मामले में वो अब मूकदर्शक नहीं बने रहना चाहता I अफ़ग़ानिस्तान और सीरिया के लिए भारत के पूर्व राजदूत रहे गौतम मुखोपाध्याय ने कहा कि संभावित भू-राजनीतिक पुनर्गठन के कारण “चीज़ें पूरी तरह उलट-पलट हो सकती हैं.” पश्चिमी देशों की लोकतांत्रिक सरकारों और भारत जैसे दूसरे लोकतांत्रिक राष्ट्र के बीच अफ़ग़ानिस्तान गठबंधन की एक ढीली कड़ी जैसा था लेकिन उम्मीद की जा रही है कि आगामी दिनों में दक्षिण एशिया में होने वाले इस बड़े खेल में पाकिस्तान, रूस, ईरान और चीन की बेहद अहम भूमिका होने वाली है I इसके बाद उन्नाव यूनिट के प्रेसिडेंट मौलाना शोएब मिस्बाही साहब ने तकरीर की और कुरान की आयतें पढ़ कर उसका मतलब समझा कर लोगों लोगों की इस्लाह की I इसके बाद काज़ी ए शहर साहब ने तकरीर की और लोगों से अमन कायम रखने की अपील की I एम.एस.ओ उत्तर प्रदेश के सदर मौलाना अबू अशरफ साहब ने आये हुये सभी मेहमानों व उपस्थित सम्मानित लोगों का शुक्रिया अदा किया I इसके बाद सलातो सलाम पढ़ा गया और दुआ पर कांफ्रेंस का इख्तेताम हुआ, काज़ी ए शहर साहब ने मुल्क में अम्न व शान्ति बने रहने की दुआ की I कांफ्रेंस में मुख्य रूप से साकिब बरकाती, सुहैल बरकाती, मु. आमिर, अब्दुल, मु. सुहैल, शीराज़ खान, इरफान बरकाती, मु.आदिल, ईशान, फैज़ान, अमन रज़ा, हमज़ा बरकाती आदि लोग मौजूद रहे I

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