मुसलमान अपने अधिकारों के लिए उठ खड़ा हो: मौलाना कमर उस्मान गनी

कानपुर- ऐसी लोकतांत्रिक व्यवस्था जहां फ़ैसला बहुमत से होता हो, जहां अधिकारों के बंटवारे, स्वतंत्र न्यायपालिका, क़ानून का राज और निष्पक्ष मीडिया की व्यवस्था न हो, वहां अल्पसंख्यकों के लिए मुश्किलें बढ़ जाती हैं। और ये हालात बहुसंख्यकों की तानाशाही की तरफ़ ले जाते हैं।

आज भी भारत का संविधान इस देश के नागरिकों का सबसे बड़ा रक्षक है। लेकिन,इसे भी पंगु बनाने की पूरी कोशिश की जा रही है। उक्त विचार बनिए तरीके फरोग ए इस्लाम हजरत अल्लामा पीर कमर गनी उस्मानी कादरी चिश्ती साहब नायक सज्जादा नशीन दरगाह सरकार बंदगी अमेठी लखनऊ लखनऊ ने एमएसओ कानपुर यूनिट द्वारा आयोजित कान्फ्रेंस बनाम तहफ्फुजे नामूसे रिसालत बा मुकाम गरीब नवाज हाल बांसमंडी कानपुर मी मुख्य वक्ता के तौर पर कही।

उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत भरे अपराधों की कई घटनाएं सामने आई हैं। मुसलमानों को पीटकर मार डालने, ऐसी घटनाओं के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रचारित करने और इस पर पूरी बेशर्मी से जीत की ख़ुशी मनाने की घटनाओं की एक कतार है ।

धर्म संसद में नफरत अंगेज बयान और तौहीने रिसालत की घटनाएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही है । जबकि मुसलमान हमेशा सब्र हुबबुल वतनी और इंसान दोस्ती का मुजाहिरा करता चला आया है मगर ये शरपसंद कट्टरपंथी विचारधारा के लोग दंगाई मानसिकता के शिकार हैं जो अपनी हरकत से बाज नहीं आ रहे हैं इसलिए मुसलमान मुल्क के अमनो अमान और संविधान की रक्षा के लिए खुद की कुर्बानी देने को तैयार हो जाए।

खास तौर से नामूसे रिसालत पर किसी तरह का समझौता हमारे ईमान पर सवालिया निशान हैं हम कुछ भी बर्दाश्त कर सकते हैं मगर ये कैसे मुमकिन है कि अपने पैगम्बर की शान में अदना भी गुस्ताखी कुबूल कर लें इतिहास गवाह है हमने कभी भी नामूसे रिसालत का सौदा नहीं किया चाहे हमें जेल जाना पडे या मुकदमात कायम किए जाएं ये हमारे बुजुर्गों की सुन्नत है और इंशाअल्लाह हम भी इस पर अमल करेंगे। बहुत हो गया जुल्म और बहुत हो गया अत्याचार अब हमें अपने अधिकारों के लिए संविधानिक तरीके से उठ खड़ा होना होगा। मुसलमानों का अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग करना भी उनके लिए ख़तरनाक हो सकता है। सोशल मीडिया पर ट्रोल हो सकते हैं। भीड़ उन पर हमला कर सकती है। इन सब बातों पर हम कब तक कान धरते रहेंगे और अपनी दुर्दशा करवाते रहेंगे। मुसलमान एक निडर और अपने पैगम्बर पर जान निछावर करने वाली कौम है । अपनी शिनाख्त और छवि को पहचानिए और मेरे साथ बेबाक होकर आवाज बुलंद कीजिए यही समय की मांग और इसी में हमारी भलाई है ।।

हजरत अल्लामा मुफ्ती मोहम्मद हनीफ सरकती मुफ्ती ए शहर कानपुर ने कहा कि मुसलमानों की खामोशी और उनके सब्र को बुजदिली समझी जा रही है इसलिए हमें अपनी खामोशी तोड़कर मुल्क को तोड़ने और इन मानवता के कातिलों के खिलाफ उठ खड़ा होना होगा ।

अध्यक्षता कर रहे शहर काजी कानपुर मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साकिब अदीब मिसबाही ने कहा कि हमारे किरदार की वजह से हमारी ये रूसवाई है हमें समाजिक जागरूकता लाकर इंकलाब पैदा करने की जरुरत है हमारी जीवन शैली का हर हिस्सा बदलाव चाहता है जिस दिन हम इस उतर गए हमें कोई नुक्सान नहीं पहुंचा सकता। संचालन कारी इसराइल अख्तर मस्ऊदी ने किया।

नातों मनकबत का नजराना कलीम दानिश, मोनिस चिश्ती, अदनान बरकाती, आदिल कादरी, ने पेश किया और कान्फ्रेंस में मुख्य रूप से शारिक बेग बरकाती, अतीक बरकाती, कारी कासिम हबीबी, मुफ्ती हनीफ साहब, कारी सगीर साहब, मौलाना अजगर अली अल्वी, मौलाना गुलाम मुस्तफा, मुफ्ती रफी निजामी, मौलाना शाह आलम बरकती, मुफ्ती वसीम मिस्बाही, मुफ्ती वसीम हसन, कारी मतलूब बरकाती, कारी एहसान साहब, मौलाना यूसुफ रजा, मौलाना वसीम साहब, मौलाना जिया उर रहमान, मुफ्ती अजमल मिस्बाही, मुफ्ती हुसैन मिस्बाही, वासिक बेग बरकाती, साकिब बरकाती, सुहैल कादरी, आदि लोग मुख्य रूप से मौजूद रहे।

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