एम.एस.ओ. की कानपुर इकाई ने कराया अज़मत ए रसूल कान्फ्रेंस का आयोजन

कानपुर – देश के सबसे बड़े छात्र संगठन मुस्लिम स्टूडेंट्स ओर्गेनाईज़ेशन कि कानपुर यूनिट ने सोमवार को रोशन नगर स्थित गौसिया मस्जिद में कोविड गाइडलान्स के अन्तर्गत सुबह 10 बजे एक प्रोग्राम अज़मत ए रसूल कान्फ्रेंस का आयोजन शहरकाज़ी कानपुर मुफ्ती साकिब अदीब मिस्बाही साहब की सरपरस्ती व मौलाना असग़र अली यार अल्वी साहब की सदारत में किया जिसमें शहर कानपुर के ओलमा किराम व दानिशवर हज़रात ने शिरकत की I कान्फ्रेंस में मेहमाने खुसूसी मुफ्ती सलमान अज़हरी साहब मुम्बई से एम.एस.ओ. कानपुर यूनिट के सदर वासिक बेग बरकाती की निवेदन पर तशरीफ लाये और उनका खुसूसी खिताब हुआ I संचालन गौसिया मस्जिद के पेशइमाम हाफिज़ रिज़वान साहब ने किया और मुहम्मद नोमान, हस्सान रज़वी, फैसल बरकाती, मुईन रज़वी ने नात शरीफ पढ़ी I

मुफ्ती सलमान अज़हरी ने अपनी तकरीर में कहा ऐसी लोकतांत्रिक व्यवस्था जहां फ़ैसला बहुमत से होता हो, जहां अधिकारों के बंटवारे, स्वतंत्र न्यायपालिका, क़ानून का राज और निष्पक्ष मीडिया की व्यवस्था न हो, वहां अल्पसंख्यकों के लिए मुश्किलें बढ़ जाती हैं और ये हालात बहुसंख्यकों की तानाशाही की तरफ़ ले जाते हैं, आज भी भारत का संविधान इस देश के नागरिकों का सबसे बड़ा रक्षक है लेकिन इसे भी पंगु बनाने की पूरी कोशिश की जा रही है I उन्होंने आगे कहा कि 2014 के बाद से मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत भरे अपराधों की कई घटनाएं सामने आई हैं मुसलमानों को पीटकर मार डालने, ऐसी घटनाओं के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रचारित करने और इस पर पूरी बेशर्मी से जीत की ख़ुशी मनाने की घटनाओं की एक कतार है I धर्म संसद जैसे कार्यक्रम में नफरत अंगेज़ ब्यान और तौहीने रिसालत की घटनाएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही है जबकि मुसलमान हमेशा सब्र हुबबुल वतनी और इंसान दोस्ती का मुज़ाहिरा करता चला आया है मगर ये शरपसंद कट्टरपंथी विचारधारा के लोग दंगाई मानसिकता के शिकार हैं जो अपनी हरकत से बाज़ नहीं आ रहे हैं इसलिए मुसलमान मुल्क के अमनो अमान और संविधान की रक्षा के लिए खुद की कुर्बानी देने को तैयार हो जाए, खास तौर से नामूसे रिसालत पर किसी तरह का समझौता हमारे ईमान पर सवालिया निशान हैं हम कुछ भी बर्दाश्त कर सकते हैं मगर ये कैसे मुमकिन है कि अपने पैगम्बर की शान में अदना भी गुस्ताखी कुबूल कर लें इतिहास गवाह है हमने कभी भी नामूसे रिसालत का सौदा नहीं किया चाहे हमें जेल जाना पडे़ या मुकदमात कायम किए जाएं ये हमारे बुज़ुर्गों की सुन्नत है और इंशाअल्लाह हम भी इस पर अमल करेंगे I

मुफ्ती सलमान अज़हरी ने आगे कहा कि बहुत हो गया ज़ुल्म और बहुत हो गया अत्याचार अब हमें अपने अधिकारों के लिए संविधानिक तरीके से उठ खड़ा होना होगा लेकिन मुसलमानों का अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग करना भी उनके लिए ख़तरनाक हो सकता है सोशल मीडिया पर ट्रोल हो सकते हैं भीड़ उन पर हमला कर सकती है इन सब बातों पर हम कब तक कान धरते रहेंगे और अपनी दुर्दशा करवाते रहेंगे। मुसलमान एक निडर और अपने पैगम्बर पर जान निछावर करने वाली कौम है अपनी शिनाख्त और छवि को पहचानिए और मेरे साथ बेबाक होकर आवाज़ बुलंद कीजिए यही समय की मांग और इसी में हमारी भलाई है।

सरपरस्ती कर रहे शहरकाज़ी कानपुर मुफ्ती मोहम्मद साकिब अदीब मिस्बाही ने कहा कि हमारे किरदार की वजह से हमारी ये रूसवाई है हमें समाजिक जागरूकता लाकर इंकलाब पैदा करने की ज़रुरत है हमारी जीवन शैली का हर हिस्सा बदलाव चाहता है जिस दिन हम इस पर उतर गए हमें कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता।

कान्फ्रेंस में मुख्य रूप से एम.एस.ओ. की कानपुर इकाई के सदर वासिक बेग बरकाती, कारी सगीर साहब, मौलाना गुलाम मुस्तफा, मौलाना मुश्ताक मुशाहिदी, मुफ्ती रफी निजामी, मौलाना फैज़ान अज़हरी, मौलाना ज़िया उर रहमान, मौलाना आफताब आलम, साकिब बरकाती, सुहैल कादरी, अब्दुल, फैज़ बेग, ज़ैद बरकाती, शाहरुख रज़ा हुसैनी, हस्सान, ज़ीशान, कामिल, शोएब मंसूरी, ज़फर खान, दानिश, नाज़िम शोएब, इख्तेदार आदि लोग मुख्य रूप से मौजूद रहे।

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