About US
IntroductionmsoMuslim Students Organisation of India
Muslim Students Organisation of India (MSO) is an apex and largest body of Muslims students (Sunni Sufi) in India. It works for community development, nation building, Career guidance and anti terrorism.
MSO was established in the city of Aligarh of U.P in 1977 by Advocate Ismael Wafa. The movement headquartered is in New Delhi.
MSO is the largest Muslim student body in India. It has sound footprint from Kashmir to Kerala, Rajasthan to Manipur. MSO is working in the 21 states of India.
MSO is against all forms of Violence and terrorist activities happening anywhere in the World and strongly condemn any act of inhuman activities against the Innocent people of the World.
MSO is of the view that Sufi Islamic teachings based on Peace, Mutual Cooperation, Love, Brotherhood and Communal Harmony are only alternative Left before the World in Order to establish Peace.
Slogan of MSO: – “Kuunuu Ma’as-sadeqeen” And Be with the Truthful. (Quran Para)
Board of AdvisorsMuslim Students Organisation of India
- His Eminence Professor Syed Muhammad Amin Miya Quadri Barkaati (Chief Patron)
(Sajjada Nasheen- Khaanqah-E-Barkaatiya, Marehra Shareef)
- Prof. Syed Liyaqat Hussain Moini Chishti (Patron)
(Gaddi Nasheen Dargaah Khwaja Ghareeb Nawaz, Ajmer Shareef)
Governing BoardMuslim Students Organisation of India
- Janab Syed Muhammed Quadri (Chairman, Mumbai)
- Janab Dr. Shujaat Ali Quadri (Vice Chairman, Delhi)
- Janab Dr Ahmad Mujtaba Siddiqui (Aligarh Muslim University)
- Janab Dr Muhammad Sarwar (Medical Officer, UP)
National CouncilMuslim Students Organisation of India
National office bearers and Secretariat:
S.N | Post | Name | State |
1 | President | Mohd Mudassir Ashrafi | Delhi |
2 | General Secretary | Zeeshan Razvi | Telangana |
3 | Finance Secretary | Saqib Barkaati | Delhi |
4 | Vice President | Abu Ashraf | UP |
5 | Vice President | Junaid Ahmed | Assam |
6 | Campus Secretary | Zeeshan Karimi | Bihar |
7 | Joint Secretary | Syed Mehboob Quadri | Karnataka |
8 | Joint Secretary | Er. Muhammad Husain Maner | Maharashtra |
9 | Joint Secretary | Ihsanul Haq | UP |
10 | Joint Secretary | Khaleel Saqafi | Kerala |
12 | Joint Secretary | Asfak Aswi | West Bengal |
National Executive Members
S.N. | Name | State |
1 | Dr. Shujaat Ali Quadri | Delhi |
2 | Basharat Saqafi | Jammu & Kashmir |
3 | Fazal Elahi Tabassum | Jammu & Kashmir |
4 | Tahseen Khan | Delhi |
5 | Saqib Barkaati | Delhi |
6 | Maulana Arif Barkaati | Uttar Pradesh |
7 | Ehtisham Ahmed | Uttar Pradesh |
8 | Umar Latifi | Uttra Khand |
9 | Nafees Khan Sherani | Rajasthan |
10 | Syed Mehshar | Rajasthan |
11 | Habib Ur Rehman Multani | Rajasthan |
12 | Muhammad Akhtar | Gujarat |
13 | Mohiuddin Rahi | Gujarat |
14 | Muhammed Sha’ban | Maharashtra |
15 | Muhammad Shaheer | Seemandhra |
16 | Zeeshan Razvi | Telangana |
17 | Zainuddin Shariff | Karnataka |
18 | Syed Mahboob Quadri | Karnataka |
19 | Khaleel Saqafi | Kerala |
20 | Nazrul Islam | Tripura |
21 | Boitullah | Meghalaya |
22 | Syed Samirul Islam | West Bengal |
23 | Asfak Ahmed Aswi | West Bengal |
24 | Nazir Mazumder | Assam |
25 | Muhammad Muzammil | Assam |
26 | Mazhar W Sheikh | Manipur |
27 | Zeeshan Karimi | Bihar |
28 | Ghulam Rabbani | Jharkhand |
29 | Shamdeen | Punjab |
30 | Ikbal Ansari | Chhattisgarh |
31 | Ali Saqafi | Andman & Nicobar |
32 | Waseem Misbahi | Madhya Pradesh |
33 | Amaan Razvi | Madhya Pradesh |
34 | Mohammad Kamil | Haryana |
35 | Rabbil Qadri | Jharkhand |
Policy and Programs Muslim Students Organisation of India
Aims and Objective
- To do Dawah work among the students & youths.
- Spread the message of peaceful Islam among the students & youth of the country.
- To provide the students & youth with a good, Islamic, educational atmosphere.
- To spread education among various sections of society with the active help of students & youths.
- To prepare students as active contributors to the community and country.
- To build the society based on the Islamic morality and spirituality.
- To teach Patriotism among students & Youths.
Methodology
- The working methodology is to organize seminars, conferences and discussions.
- The Dars-e-Quran with Question and Answers Session is organized for Students in Understanding various Islamic Problems.
- MSO prepares students and Youth to spread Islam; it provides those necessary opportunities, guidance and resources.
- MSO also organizes educational Camps during URS i.e. birth or Death Anniversary of Sufi Scholars and conducts Help Camps on various Important Occasions.
- It distributes books, pamphlets, posters, and Calendars among the students of various campuses.
How to Work
- Increase Membership in every Street/Hostel/Units.
- Members meeting on 30th of each Month or on last Sunday of Each Month.
- Full Plan for next Days and report of past days activities.
- Appoint at least a M.S.O In charge in each Masjid of the City.
- With Urgent preference in Each College and School and in Madarsa there should be one or More MSO representatives.
- They should appoint Class in Charges via them the M.S.O Literature should be distributed.
Collect them on Meeting day via SMS/Call. - Write their proper attendance with full Contact add Including E-Mail.
- Establish Weekly Quran Class in any Large Masjid or Room under the Supervision of an Aalim, Which should Include Tilawat, Naat, Tafseer, Sawalat and Salaat-o-Salam.
- Maintain Proper Accounts and Keep registers with Reports of Meeting/Plan/Press Coverage etc separately.
तरीक-ए-अमल और निजाम-उल-अमल (Policy & Program in hindi)
नस्बुलएइन (Aims and Objective)
- नौजवानों और तोल्बा के दरमियान इस्लाम के पैगाम को फैलाना.
- नौजवानों और तोल्बा को असरी दर्सगाहो और यूनिवर्सिटीज में इस्लामी माहोल फराहम करना.
- नौजवानों और तोल्बा को तालीम याफ्ता बनाना और इसके लिए जद्दोजेहद करना.
- नौजवानों और तोल्बा को मिल्लत और मुल्क का सरमाया बनाना.
- समाज और माहोल को इस्लामी तहजीब और तमद्दुन का गहवारा बनाना.
- नौजवानों और तोल्बा के दिलो में अम्बियाँ-ए-किराम की मुहब्बत, औलिया-ए-किराम की अज़मत और बुज़ुर्गाने दीन की उल्फत पैदा करना.
- नौजवानों और तोल्बा में हुब्बुल वतनी का जज्बा पैदा करना.
उसूलियात व मिन्हाजियात ( Methodology)
- तंजीम के अगराज़ व मक़ासिद के हुसूलयाबी के लिए मुन्दर्जाजेल मिन्हाजियात व उसूलियात इख्तियार किये जायेंगे.
- इस्लाम के पैगाम और दावती काम के फरोग के लिए कॉलेज कैम्पस, युनिवर्सिटी कैम्पस व शहर में हफ्तावारी, पन्द्रहरोज़ाना या माहाना “दर्स-ए-क़ुरान” का इनकाद करना.
- मुख्तलिफ औक़ात पर मुख्तलिफ उन्वान पर सेमिनार, कांफेरेंसस, सिम्पोजियम और बहसों-मुबाहिसा का इनकाद करना.
- तालीमी बेदारी और इल्मी मेयार के फरोग के लिए वर्कशॉप का इन्काद करना.
- नौजवानों और तोल्बा को कैम्पसेज में इस्लामी माहोल देने के लिए दर्से कुरान व दर्से हदीस के साथ साथ मुख्तलिफ मज़ामीन पर लिट्रेचर फराहम करना.
- नौजवानों और तोल्बा को दुनियावी एतबार (तालीम और जॉब) से दूसरे कौमों के मसावी बनाने के लिए ज़रूरी मवाके फराहम करना, गायेडअंस कैंप (रहनुमाई कैंप) का इन्काद करना, और उनको वसीला फराहम करना.
- नौजवानों और तोल्बा में तसव्वुफ और रूहानियत के फरोग के लिए बुजुर्गान-ए-दीन के उर्स पर कैंप का इन्काद करना.
- नौजवानों और तोल्बा में अख्लाकियात और तहजीब व सकाफ़ती अतवार के फरोग के लिए वर्कशॉप का इन्काद, लिट्रेचर और क़ुतुब फराहम करना.
- मदारिस और दीनी इदारो के तुलबा को युनिवर्सिटी और कॉलेज में दाखिला के लिए ज़रूरी वसायेल फराहम करना व बड़े सुन्नी इजलास व उर्स के मौके पे “हेल्प कैंप” का इन्काद करना. (जैसे उर्से क़ासमी बरकाती, उर्से रज़वी और अजमेर शरीफ के उर्स के मौके पर)
- मुख्तलिफ उन्वानात पर मुश्तमिल मज़ामीन, पंम्फ्लेट, कैलेंडर और पोस्टर फराहम करना.
सालाना निजाम-ए-तक्वीम (Yearly Work Calendar)
- लिट्रेचर और पम्फलेट के ज़रिये ज़कात की आगाही और वाक्फियत पैदा करना, शबे कद्र की अहमियत व इफादियत पर रौशनी.
- जंगे बद्र के याद में प्रोग्राम
- ईद के मौके पे ईद मिलन का प्रोग्राम, इस्तक्बालिया बैनर और पम्फलेट का इंतज़ाम.
- ईद के मौके पे गरीबो व यतीमो को मुमकिन अतिया (Gifts), तोहफा देना.
- ईद के बाद “ईद मिलन” का इन्काद जिसमे मुख्तलिफ मज़ाहिब के लोग व अफसरान को दावत देना, सियासी लोगो से परहेज़ किया जाए,
- उर्से क़ासमी बरकाती मारेहरा शरीफ का विजिट.
- हुज्जाजे किराम के तरबियत के लिए “हज ट्रेनिंग” कैंप का इन्काद, हज गाईड का फराहम करना, हाजियो के लिए “अलविदाई तकरीब” व वापस आने पर “इस्तक्बालिया प्रोग्राम” का इन्काद करना.
- ईदुल-अज़हा (बकरीद) के मौके पर गरीबो में गोश्त का तकसीम करना.
- मुहर्रम के महीने में “अहलेबैत” की अज़मत व इफादियत और कर्बला के हवाले से तकरीब का इन्काद करना.
- ईद मिलादुन्नबी सल्लल्लाहो वसल्लम के मौके पे एक हफ्ता मुस्तकिल “सीरत हफ्ता” के नाम से मनाना, जिसमे सीरत के हवाले से मुख्तलिफ प्रोग्राम जैसे, तोल्बा के दरमियान मज़मून निगारी (Essay Writing), तकरीरी मुकाबला, कुइज़ मुकाबला और नात गोई वगेरह प्रोग्राम का इन्काद.
- जुलूस-ए-मिलाद में बैनर समेत शिरकत व शहर में बैनर लगाना. जुलूस में मुनासिब मक़ाम व मकामात पर “मेंबरशिप कैंप” लगाना और मेम्बर साजी करना, साथ ही हेल्प कैंप का भी इन्काद करना.
- उर्से रज़वी के मौके पर व उर्से मखदूम अशरफ व दीगर बुज़ुर्गानेदीन के उर्स पर खास ग्रुप जियारत करना व उनकी खिदमात पर प्रोग्राम करना.
- यौमे गौसे आज़म पर “तसव्वुफ” के हवाले से प्रोग्राम करना.
- वलेंटाइन डे पर पोस्टर व पम्फलेट के ज़रिये इस्लामी तहजीब व तमद्दुन को आम करना.
तरीका-ए-कार (How to Work ?)
- मोहल्लात, कस्बात, शहर, कॉलेज और हॉस्टल और युनिवर्सिटी में मेम्बर बनाना.
- सारे मेम्बर की हर महीने की किसी तैशुदा तारीख या आखिरी इतवार में मीटिंग हो, जिसमे अगले पूरे महीने के वर्क प्लान पर फ़िक्र वो तदबीर हो और गुजिश्ता महीने की कारगुजारी पर बहस हो.
- शहर के हर मसजिद में S.O का कमसे कम एक नुमाइंदा हो.
- शहर के सभी स्कूल, कॉलेज और दीनी मदारिस में S.O की शाख हो, मजीद हर क्लास और जमात का एक इंचार्ज मुतय्यन हो. इन्ही इंचार्ज के ज़रिये बुनियादी मवाद, पम्फलेट और लिट्रेचर का तकसीम हो. कही पर भी M.S.O का कोई भी प्रोग्राम या तकरीब हो तो इन्ही इंचार्ज को फोन, SMS के ज़रिये इत्तेला दे दी जाए.
- माहाना मीटिंग और प्रोग्राम की बाज़ाफ्ता एक रजिस्टर में हाजरी हो जिनमे फोन, ईमेल और पूरा पता हो.
- शहर के किसी सुन्नी मस्जिद (बेहतर है कि जमा मस्जिद) में हफ्तावारी “कुरान क्लास्सेज” का इन्काद हो, जिसमे वो नौजवान या शख्स जो कुरान पढ़ना नहीं जानते हो, उनको तज्वीद के साथ कुरान सिखाया जाए.
- हर मीटिंग की बाज़फ्ता रिपोर्ट तैयार किया जाए, अखबारात की कटिंग्स को महफूज़ रखा जाये, और माली मामले में खास तवज्जो दी जाए और प्रोपर अकाउंट को तैयार रखा जाए.
- मीडिया और न्यूज़ वालो से राब्ता रखा जाए, हर प्रोग्राम की रिपोर्ट को अखबारात में भेजा जाये और समाजी, मिल्ली मसाएल पर भी प्रेस रिलीज दिया जाए. सियासी मौज़ुवात पर या किसी भी सियासी जमात के फेवर में या मुखालिफत में कोई बयानबाजी न की जाए.